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लोधी, लोदी, लोध, लोधा, लोढ़ा — एक वंश, अनेक रूप : ऐतिहासिक तुलनात्मक अध्ययन

Nov 12, 2025  Brij Lal Lodhi  16 views
लोधी, लोदी, लोध, लोधा, लोढ़ा — एक वंश, अनेक रूप : ऐतिहासिक तुलनात्मक अध्ययन

अध्याय – 3 --

लोधी, लोदी, लोध, लोधा, लोढ़ा — एक वंश, अनेक रूप : ऐतिहासिक तुलनात्मक अध्ययन :---

भारतवर्ष के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में “लोधी” वंश का स्थान अत्यंत विशिष्ट रहा है।
यह वंश कृषि, परिश्रम, वीरता और आत्मसम्मान का प्रतीक माना गया।
समय, क्षेत्र और भाषा के परिवर्तन के कारण इसका स्वरूप लोध, लोधी, लोदी, और लोधा — इन चार रूपों में विकसित हुआ, किंतु मूल वंशीय आधार एक ही रहा।

1-- लोध — सबसे प्राचीन स्वरूप:--
     “लोध” शब्द वैदिक और अपभ्रंश साहित्य में प्राचीनतम माना गया है।
“लोध” संभवतः संस्कृत मूल लवण, लव, या लोध्र से बना है — जिसका अर्थ भूमि, परिश्रम या औषधीय वृक्ष से जुड़ा है।
राजतरंगिणी, बृहत्संहिता, और प्राचीन आर्य ग्रंथों में “लोध” या “लोधक” नाम से कृषक क्षत्रियों का उल्लेख मिलता है।
इनकी पहचान भूमि से जुड़ी हुई — अर्थात भूमिपुत्रों की रही है।

2 -- लोधी — मध्यकालीन भारत का कृषक-क्षत्रिय रूप :--

मध्यकाल में “लोध” से “लोधी” शब्द का विकास हुआ।
‘ई’ प्रत्यय ने इसे वंशीय पहचान दी — जैसे “तोमर”, “सोलंकी”, “राठी” की तरह “लोधी” भी एक कुलवाचक शब्द बना।

ब्रिटिश गज़ेटियर (1909) और राजपूताना गज़ेटियर (1879) दोनों ने उल्लेख किया कि लोधी समाज “राजपूत मूल के कृषक वर्ग” हैं, जिन्होंने कृषि को अपना मुख्य व्यवसाय बनाया।

डॉ. जी.एस. ओझा ने अपने राजपूत इतिहास में लिखा — “लोध, लोधा, और लोधी जातियों का सम्बन्ध प्राचीन आर्य क्षत्रिय वर्ग से है, जिन्होंने कालांतर में कृषक जीवन अपनाया।”
इस प्रकार “लोधी” शब्द मध्यकालीन भारत में एक शक्तिशाली कृषक-क्षत्रिय समुदाय के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।

3 -- लोदी — भाषाई और भौगोलिक परिवर्तन से विकसित रूप :--

“लोदी” शब्द विशेषतः अफगानिस्तान और पंजाब क्षेत्र में प्रयोग में आया।
Tarikh-e-Firishta (1609) के अनुसार — “The Lodis are a branch of the Afghan tribe, descended from the Ghilzai stock, who came from Roh and established their power in India.”

यहाँ “लोधी” का फारसीकृत रूप “लोदी” के रूप में लिखा गया।
फारसी और पश्तो भाषाओं में “ध” ध्वनि “द” में बदल जाती है, अतः “Lodhi” → “Lodi” बना।
इसलिए बहलोल लोदी, सिकंदर लोदी, और इब्राहिम लोदी — इस वंश के शासक मूलतः लोधी वंश की अफगान शाखा थे।

Irfan Habib लिखते हैं — “The Lodi dynasty, though of Afghan origin, had long been Indianized.”
(लोदी वंश अफगान मूल का था, पर भारत में पूर्णतः भारतीयीकृत हो चुका था।)

4 -- पंजाब में लोधी वंश की भूमिका :--

Punjab Gazetteer (1892) में दर्ज है — “The city of Ludhiana derives its name from the Lodhi clan, once dominant here.”

अर्थात् लुधियाना नगर का नाम “लोधी” समुदाय से उत्पन्न हुआ।
बहलोल लोदी के शासनकाल में पंजाब के इस क्षेत्र में लोधी प्रशासनिक केंद्र स्थापित किया गया था।
कई इतिहासकार मानते हैं कि “लोधीआना” (Lodhi + Aana) — “लोधियों का नगर” — बाद में लुधियाना बन गया।

Imperial Gazetteer (1909) में यह भी उल्लेख है कि  -- “The Lodhis of the United Provinces trace their ancestry from the Lodhis of Punjab plains.”

इस प्रकार पंजाब, दिल्ली, और उत्तर भारत में “लोधी” जाति एक कृषक और योद्धा दोनों रूपों में जानी गई।

5 -- पश्चिम भारत में “लोधा” का विकास :--

राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में “लोधी” का स्थानीय रूप “लोधा” के नाम से जाना गया।
Gazetteer of Rajputana (1879) के अनुसार — “Lodh and Lodha are found in Mewar and Marwar, mostly agriculturists, some claiming Rajput descent.”

मराठी, राजस्थानी और गुजराती भाषाओं में “ध” → “ढ” ध्वनि-परिवर्तन ने “लोधी” को “लोधा” और "लोढ़ा" बना दिया।
ब्रिटिश रिकार्ड्स में “Lodha Thakur” और “Lodha Patel” के रूप में इनका उल्लेख है।
इस प्रकार “लोधा” और "लोढ़ा" समाज भी लोधी वंश की ही एक क्षेत्रीय शाखा है।

6 -- पाकिस्तान-पंजाब में मुस्लिम लोध समुदाय :--

विभाजन से पूर्व पंजाब के जो क्षेत्र अब पाकिस्तान में हैं — जैसे गुर्जरवाला, सियालकोट, मुल्तान और झेलम —
वहाँ के मुस्लिम कृषक समुदाय आज भी अपने नाम के साथ “लोधी” या “लोदी” या "लोध" लिखते हैं।
स्थानीय जनगणना रिपोर्ट (Punjab District Census, 1931) में “Lodhi Pathans” और “Muslim Lodhs” दोनों का उल्लेख मिलता है।
यह स्पष्ट संकेत देता है कि लोधी वंश की शाखा ने धर्म-परिवर्तन के बाद भी अपनी जातीय पहचान बनाए रखी।

7 --  तुलनात्मक सार-सारणी :--

लोध -- ‌
निवास क्षेत्र - आर्यवर्त (उत्तर भारत)- 
भाषाई क्षेत्र -संस्कृत/ हिन्दी।
ऐतिहासिक पहचान - कृषक क्षत्रिय, भूमि से जुड़ा वर्ग।

लोधी  -- 
निवास क्षेत्र - मध्य/उत्तर भारत
भाषाई क्षेत्र - हिन्दी, ब्रज, अवधी।
ऐतिहासिक पहचान - कृषक राजपूत समुदाय।

लोदी -- 
निवास क्षेत्र - अफगानिस्तान, पंजाब
भाषाई क्षेत्र -  फारसी, पश्तो।
ऐतिहासिक क्षेत्र - दिल्ली सल्तनत के शासक, अफगान शाखा।

लोधा और लोढ़ा -- 
निवास क्षेत्र - राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र।
भाषाई क्षेत्र - हिंदी /मराठी।
ऐतिहासिक पहचान - कृषक क्षत्रिय।

लोधी, लोध (मुस्लिम) --
 क्षेत्र - पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान) 
भाषाई क्षेत्र - उर्दू, 
ऐतिहासिक पहचान - पंजाबी/ इस्लाम अपनाने वाले लोधी राजपूत।

8 --  प्रमुख ऐतिहासिक संदर्भ :-

1--Tarikh-e-Firishta (1609) – मोहम्मद क़ासिम फ़िरिश्ता

2 --Ain-e-Akbari – अबुल फ़ज़्ल

3 -- Imperial Gazetteer of India (1909)

4 -- Punjab Gazetteer (1892)

5 -- Gazetteer of Rajputana (1879)

6 -- British Gazetteer of U.P. (1909)

7 -- Dr. G.S. Ojha – Rajput Itihas (1912)

8 - Irfan Habib – Medieval India (1982)

9 -- Sir Olaf Caroe – The Pathans: 550 B.C. to A.D. 1957

9 - निष्कर्ष :--

“लोध, लोधी, लोदी, लोधा, लोढ़ा” — ये केवल भाषाई भिन्नताएं हैं; वंश एक ही है — भूमिपुत्र, परिश्रमी, और क्षत्रिय आत्मा से ओत-प्रोत।
इस वंश ने पंजाब की मिट्टी से लेकर अफगान की पर्वतीय सीमाओं तक अपनी पहचान बनाई।
जहां कहीं भी यह वंश रहा — वहां उसने भूमि, परिश्रम और स्वाभिमान को सर्वोच्च मूल्य माना।


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