अध्याय ४ :
लोधी वंश — हिंदू से मुसलमान बनने की ऐतिहासिक प्रक्रिया :--
(इतिहास की आँखों से देखा गया सत्य)
भूमिका :--
भारत के इतिहास में “लोधी” नाम का प्रयोग कई रूपों में मिलता है — लोध, लोधा, लोढ़ा , लोधी, लोदी आदि। इनका मूल संबंध प्राचीन आर्य-क्षत्रिय कुल से है। प्रारंभ में ये पश्चिमोत्तर भारत (अफगानिस्तान, गांधार, मुल्तान, पंजाब) के निवासी थे, जो कालांतर में उत्तर भारत में बस गए।
लोधी शब्द का अर्थ “लोधा” या “लव-वंशी” (लव पुत्र श्रीराम के वंशज) से भी जोड़ा गया है।
प्राचीन काल : लोधी वंश की क्षत्रिय पहचान :--
डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा (Rajput Itihas) के अनुसार -- “लोध, लोधा अथवा लोधी प्राचीन आर्य क्षत्रिय कुल से उत्पन्न हैं, जिनका मूलस्थान उत्तर-पश्चिम भारत रहा है। यह समाज कृषि, सैनिक सेवा और शासन कार्य में अग्रणी रहा।”
“अइन-ए-अकबरी” (अबुल फ़ज़ल) तथा “गज़ेटियर ऑफ़ राजपूताना” (1879) में भी यह उल्लेख है कि — “लोधी जाति भारतीय मूल की है और इनकी उपस्थिति राजपूताना, बुंदेलखंड और मध्य भारत तक फैली रही है।”
इस प्रकार प्रारंभिक काल में लोधी हिन्दू क्षत्रिय समाज का अंग था।
मध्यकाल : अफगान क्षेत्र में परिवर्तन और इस्लामीकरण :--
11वीं शताब्दी के बाद जब महमूद ग़ज़नवी तथा उसके पश्चात ग़ोरी वंश ने अफगान क्षेत्र में अपना प्रभुत्व स्थापित किया, तब वहाँ के स्थानीय क्षत्रिय, राजपूत और हिन्दू योद्धा वंश इस्लामी शासन के अधीन आ गए।
इनमें कुछ ने जीवन और संपत्ति की रक्षा के लिए, तो कुछ ने राजनैतिक अवसरों के कारण इस्लाम स्वीकार किया।
“Tarikh-e-Firishta” (1609) के अनुसार — “लोदी (Lodi) मूलतः हिंदू योद्धा जाति थी, जो अफगान क्षेत्र में इस्लाम में परिवर्तित हो गई और बाद में भारत आकर सत्ता में आई।”
ब्रिटिश इतिहासकार सर ओलफ कारो (Olaf Caroe) ने The Pathans (1857) में लिखा -- “The Lodis were originally of Indian Kshatriya stock who adopted Islam in the frontier region and rose to prominence in the Afghan confederacy.”
भारत में लोधी वंश का उत्थान :--
13वीं से 15वीं शताब्दी तक जब दिल्ली सल्तनत के काल में अफगान योद्धा आने लगे, उन्हीं में लोधी भी थे।
दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक वंश — लोधी वंश (1451–1526) — के संस्थापक बहलोल लोदी के पूर्वज हिंदू लोधी क्षत्रिय थे, जिन्होंने अफगान क्षेत्र में इस्लाम स्वीकार किया था।
“इंपीरियल गज़ेटियर ऑफ़ इंडिया” (1909) में लिखा गया — “The Lodis who ruled Delhi were of Afghan origin but their ancestors were Indian Rajputs who had embraced Islam.”
इससे स्पष्ट है कि लोधी मूलतः भारतीय हिंदू क्षत्रिय थे, जिनमें से एक शाखा अफगान क्षेत्र में जाकर इस्लाम में परिवर्तित हुई और फिर भारत लौटकर सत्ता प्राप्त की।
भारत में हिंदू लोधी वंश की निरंतरता :--
दिल्ली के लोधी शासकों के इस्लामी रूप के समानांतर, भारत के अन्य भागों — जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बुंदेलखंड और राजस्थान — में लोधी समाज हिंदू रूप में निरंतर विद्यमान रहा।
इन क्षेत्रों में लोधी कृषक, जमींदार और योद्धा समाज के रूप में आज भी “लोधी राजपूत” या “लोधी क्षत्रिय” कहलाते हैं।
ब्रिटिश गज़ेटियर (U.P., 1909) में उल्लेख है — “In Bundelkhand and the Doab region, the Lodhis are agriculturists of Rajput origin, known for valor and landownership.”
निष्कर्ष :--
1-- लोधी वंश का मूल हिंदू क्षत्रिय समाज था।
2--अफगान क्षेत्र में इनकी एक शाखा ने इस्लाम स्वीकार किया और वह अफगान-लोदी कहलाई।
3--भारत में लोधी वंश दो समानांतर स्वरूपों में रहा —
(अ)हिंदू लोधी (राजपूत, कृषक, योद्धा वर्ग)
(ब)मुस्लिम लोधी (दिल्ली सल्तनत के शासक वर्ग)
4 -- यह दोनों शाखाएँ एक ही मूल वंश से उत्पन्न मानी जाती हैं, जैसा कि डॉ. ओझा, फिरिश्ता, और गज़ेटियर लेखों से प्रमाणित होता है।
प्रमुख ऐतिहासिक संदर्भ :--
1--Tarikh-e-Firishta (1609)
2 -- Ain-e-Akbari – अबुल फ़ज़ल
3 --Imperial Gazetteer of India (1909)
4 -- Punjab Gazetteer (1892)
5 -- Gazetteer of Rajputana (1879)
6 -- British Gazetteer of U.P. (1909)
7 -- Dr. G.S. Ojha – Rajput Itihas
8 -- Irfan Habib – Medieval India
9 -- Sir Olaf Caroe – The Pathans: 550 B.C. to A.D. 1957
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