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यदि मैं विधायक होता -

Oct 30, 2025  Brij Lal Lodhi  15 views
यदि मैं विधायक होता -

यहां मैंने आपकी भावना के अनुरूप — “यदि मैं विधायक होता” — शीर्षक से एक गंभीर, चिंतनशील और नीति-प्रधान भाषण शैली में लेख तैयार किया है आप इसे जरूर पढ़ें, अपने विधायक को भेजें और शेयर करें।👇

🏛️ शीर्षक --"यदि मैं विधायक होता"

(लेखक – ब्रजलाल लोधी “एडवोकेट”,  सामाजिक चिंतक, लखनऊ)
प्रदेश अध्यक्ष -- अखिल भारतीय लोधी लोधा राजपूत महासभा उत्तर प्रदेश।

यदि मैं विधायक होता,
तो मेरे लिए विधायक होना कोई “पद” नहीं, बल्कि जनता का विश्वास और जिम्मेदारी होती।
मैं यह मानता कि जनता ने मुझे केवल जीताने के लिए नहीं,
बल्कि अपनी आवाज़, अपने हक़, अपने सपनों का प्रतिनिधि बनाने के लिए चुना है।

विधायक होना केवल विधान भवन की कुर्सी पर बैठना नहीं है —
यह तो हर उस उम्मीद का प्रतीक है,
जो गरीब, किसान, नौजवान, महिला और बुजुर्ग ने अपने दिल में बोई है।

🌾 जनता के प्रति जवाबदेही :-

यदि मैं विधायक होता,
तो मैं सबसे पहले अपने क्षेत्र की जनता के प्रति जवाबदेही तय करता।
मैं हर महीने एक “जन संवाद दिवस” रखता,
जहां कोई भी नागरिक सीधे अपनी बात मुझ तक रख सकता।
मेरा कार्यालय हमेशा खुला रहता,
क्योंकि जनप्रतिनिधि का असली कार्यालय जनता के बीच होता है,
ना कि केवल राजधानी में।

🏫 विकास और शिक्षा :-

मैं यह सुनिश्चित करता कि मेरे क्षेत्र के हर बच्चे को
सरकारी विद्यालय में भी वैसी ही शिक्षा मिले
जैसी निजी स्कूलों में दी जाती है।
मैं शिक्षकों की उपस्थिति, स्कूलों की स्थिति और
बच्चों के भविष्य को अपनी जिम्मेदारी मानता।

विकास मेरे लिए केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं होता —
बल्कि मानव विकास, शिक्षा, रोज़गार और सुरक्षा का संतुलित मेल होता।

🏥 स्वास्थ्य और जनसेवा :--

यदि मैं विधायक होता,
तो मेरे क्षेत्र के हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को मैं सशक्त बनाता।
गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और असहाय लोगों के इलाज के लिए
स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराता।
क्योंकि मैं जानता हूं कि एक बीमार समाज कभी मजबूत नहीं हो सकता।

🛠️ रोज़गार और आत्मनिर्भरता :--

मैं युवाओं के लिए “कौशल विकास केंद्र” खोलता,
जहां वे प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन सकें।
मेरे क्षेत्र का हर युवा,
सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा में न बैठा रहे —
बल्कि अपने हुनर से रोजगार सृजित करे।
मैं स्थानीय उद्योगों, कुटीर उद्योगों और स्टार्टअप योजनाओं को बढ़ावा देता।

🌳 पर्यावरण और ग्राम विकास :--

मैं यह मानता कि एक विधायक का असली चेहरा
उसके गांवों की स्वच्छता, हरियाली और जल-संरक्षण से झलकता है।
मैं हर ग्राम सभा को विकास का केंद्र बनाता,
जहां पंचायतें सशक्त हों और जनता निर्णय में भागीदार बने।

⚖️ राजनीति में नैतिकता :--

यदि मैं विधायक होता,
तो मैं राजनीति को पेशा नहीं, सेवा का माध्यम मानता।
मैं कभी जाति, धर्म, वर्ग या क्षेत्र के आधार पर भेदभाव नहीं करता।
मेरे लिए सबसे बड़ा धर्म “जनकल्याण” होता।

मैं विधान सभा में केवल भाषण देने नहीं,
बल्कि अपने क्षेत्र की समस्याएं उठाने जाता।
हर विधेयक पर बोलता, सवाल करता,
क्योंकि विधायक की असली पहचान उसकी सक्रियता और ईमानदारी होती है।

🕊️ समापन विचार :--

यदि मैं विधायक होता,
तो मैं अपने कार्यों से यह सिद्ध करता कि
जनता ने मुझ पर जो भरोसा किया,
वह व्यर्थ नहीं गया।
मैं हर पांच वर्ष में वोट मांगने नहीं,
बल्कि हर दिन “जनसेवा” करने जनता के बीच उपस्थित रहता।

मेरे लिए विधायक होना —
राजनीतिक उपलब्धि नहीं,
बल्कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी परीक्षा होती।
और मैं यह प्रयास करता कि
इस परीक्षा में जनता के सामने हमेशा उत्तीर्ण रहूं।

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