🌼 मां के बिना पहली दीवाली :-
आज मेरी पहली दीवाली है… लेकिन मां के बिना।
सुबह से ही मन भारी है। घर में दीपक जलाने की तैयारी तो है, पर भीतर का दीपक बुझा-सा है।
हर साल मां इंतजार करती थी — “बेटा आ गया क्या?”
दीपावली के दिन मां की मुस्कान ही तो इस घर की असली रोशनी होती थी।
आज वह मुस्कान कहीं नहीं है… केवल यादों का सन्नाटा है।
आज जब घर पहुँचा तो लगा जैसे मां किसी कमरे से पुकारेंगी —
“बेटा, आ गए? थक गए होंगे, पहले कुछ खा लो।”
लेकिन कोई आवाज़ नहीं आई।
घर वही है, पर उजाला फीका है।
मां की अनुपस्थिति ने इस त्यौहार की रौनक छीन ली है।
22 अगस्त 2024 — वह दिन जिसने मेरी दुनिया बदल दी।
उस दिन मां हमें हमेशा के लिए छोड़ कर चली गईं।
पिताजी पहले ही 21 जुलाई 2022 को विदा हो चुके थे।
अब हम चार भाई हैं, भरा-पूरा परिवार है, पर जो अपनापन, जो स्नेह, जो आशीर्वाद मां के साथ था —
वह कहीं खो गया है।
आज महसूस कर रहा हूं कि माता-पिता के बिना जीवन कैसा अधूरा हो जाता है।
उनके रहते हम जिन छोटी-छोटी बातों को सामान्य समझते हैं — वही उनके न रहने पर सबसे बड़ी कमी बन जाती हैं।
मां के बिना दीपावली तो है, लेकिन दीया जैसे बिना तेल के —
जल तो रहा है, पर रोशनी नहीं दे रहा।
हे मां…
मैं तुम्हें शत्-शत् नमन करता हूं।
तुम्हारे चरणों में वंदन करता हूं।
तुम्हारे बिना यह जीवन अधूरा है, पर तुम्हारी यादों में ही अब सारा जीवन जीना है।
तुम्हारे आशीर्वाद से ही यह दीपक जलाए रखूंगा।
🌹 संदेश उन सबके लिए
जो अपने माता-पिता के साथ हैं —
उन्हें प्यार दीजिए, समय दीजिए, और सम्मान दीजिए।
क्योंकि जब वे नहीं रहेंगे, तब केवल यादें रह जाएंगी…
और वह खालीपन कभी नहीं भरेगा।
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