Lodhi Patrika - Lodhi Samaj News

Header
collapse
...
Home / परंपराएँ एवं संस्कृति / बहुओं के अलग रहने की प्रवृत्ति- रिश्तों के विघटन की मार्मिक कहानी

बहुओं के अलग रहने की प्रवृत्ति- रिश्तों के विघटन की मार्मिक कहानी

Oct 21, 2025  Brij Lal Lodhi  24 views

🏡 बहुओं के अलग रहने की संस्कृति – रिश्तों के विघटन की मार्मिक कहानी

कई दिनों से एक ख्याल मन में उठता है —
आख़िर इस भौतिकवादी युग में हम सब भाग कहाँ रहे हैं?
और सबसे दुखद बात यह है कि
हम सब भाग तो रहे हैं, पर पहुँच कोई कहीं नहीं रहा।

हमारे दादा-पिता के ज़माने में आठ-दस भाई-बहन हुआ करते थे।
एक ही आय से सबकी पढ़ाई, शादियाँ, और बुआओं की विदाई तक हो जाती थी।
घर छोटा था, पर दिल बहुत बड़े थे।
हर आँगन में हँसी गूँजती थी, हर रिश्ते में अपनापन था।

आज सब कुछ उलट गया है।
अब दो बच्चे भी संभलते नहीं,
मां-बाप का बुढ़ापा बोझ बन गया है।
बच्चे शहर छोड़ गए, देश छोड़ गए —
और अब बस इतना कहते हैं,
“पापा, वो घर बेच दीजिए, अब आपके रहने का क्या काम?”

कई बेटे तो ऐसे हैं जो
मां-बाप को बस औपचारिक रिश्ता मानते हैं।
कुछ तो उन्हें याद भी नहीं करते।
कितनी बार देखा गया है कि
बुजुर्ग मां-बाप की लाशें तब मिलीं
जब पड़ोसी को घर से बदबू आने लगी।
और कुछ बेटे तो मां-बाप के मरने पर भी
घर नहीं लौटे…

सोचिए, ये कौन-सा विकास है?
कौन-सी आधुनिकता है जो
हमसे हमारे ही माता-पिता छीन ले गई?

और हाँ —
इसमें दोष सिर्फ बेटों का नहीं है,
उतना ही, बल्कि उससे भी ज़्यादा दोष
उनकी पत्नियों का है,
जो सास-ससुर को कभी अपने माता-पिता नहीं मान पाईं।
या शायद उनके अपने माता-पिता ने
उन्हें ऐसे संस्कार दिए ही नहीं।

जहाँ कभी “घर” हुआ करता था,
अब “फ्लैट” है।
जहाँ कभी मोहल्ला था, अब “गेटेड सोसाइटी” है।
जहाँ रिश्ते थे, अब “वाट्सऐप ग्रुप” हैं।

कब आख़िरी बार हमने घास पर बैठकर बातें की थीं?
कब पेड़ से अमरूद तोड़ा था?
कब किसी के घर शादी में बैठकर मटर छीली थी?
याद नहीं…

हम सब भूल गए हैं मिट्टी की खुशबू,
आँगन की रौनक, और रिश्तों की गर्माहट।
अब बस बची है एसी की ठंडी हवा,
पर दिलों की गर्मी गायब है।

एक दिन यह “फ्लैट संस्कृति”
सारे रिश्ते निगल जाएगी —
और तब तक शायद बहुत देर हो चुकी होगी। 💔

 


Share:

Tags: Sanjay Verma

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Your experience on this site will be improved by allowing cookies Cookie Policy